दिल्ली दिलवालों की…भाग 2

कालका जी 

यह मंदिर देवी काली या कालका (जो की दुर्गा की अवतार मानी जाती है ) को समर्पित है और दक्षिण दिल्ली , कमल मंदिर के पास स्थित है । यह देवी शक्ति के सिद्ध पीठ में से एक है। इसे मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता है। मंदिर दिल्ली के प्रमुख पर्यटक आकर्षण में से एक है ।  लोककथाओं के अनुसार , पांडवों और कौरवों ने यहां पूजा की थी। कुछ लोगो का कहना है की यह मंदिर 1764  में बनाया गया था तथा मध्य 19 वीं सदी में राजा केदारनाथ (सम्राट अकबर के कोषाध्यक्ष) ने मंदिर में कुछ परिवर्तन करवाये। वैसे तो पुरे साल यहाँ भक्तों का आना लगा रहता है परन्तु शरद नवरात्र व चैत्र नवरात्र में ख़ास तोर पर  श्रद्धालु दूर दूर से माँ का आशीर्वाद लेने आते है। कालकाजी मेट्रो स्टेशन मंदिर प्रांगण के साथ ही बना हुआ है|

हुमायूँ का मक़बरा

humayun's tomb

मुग़ल शासन काल ने दिल्ली को अनेक स्मारक व इमारतें दी।  जिनमे से एक है वो इमारत जिस पे मेरी नज़र पड़ी और कुछ पल के लिए ठहर सी गयी… वह है मुग़ल शासक हुमायूँ का मक़बरा जो अपने आप में वास्तु कला का एक बे-हद सुन्दर नमूना है। 1570 में यह हुमायूँ की पहली बेगम द्वारा बादशाह की याद  में बनवाया गया था। भारत में मुग़ल कारीगरी का यह पहला नमूना था। यह मक़बरा चारो तरफ से फारसी शैली में बने सुन्दर बागीचों से घिरा हुआ है जिन्हे “चार बाग़” कहा जाता है| यह मक़बरा मथुरा रोड पर निज़ामुद्दीन दरगाह के सामने स्थित है। यह जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के समीप है।  यह पुरे सप्ताह खुला रहता है व प्रवेश शुल्क केवल 10 रु. है।

कमल मंदिर (लोटस टेम्पल )

कमल मंदिर बहाई धर्म का मंदिर है. यह एक कमल के फूल के आकार में बनाया गया है और दुनिया के सात प्रमुख बहाई के मंदिरों के अंतिम है। इसका निर्माण 1986  में पूरा किया गया। यह संरचना शुद्ध सफेद संगमरमर से बनी है वास्तुकार फुरिबुर्ज़ सभा हिंदू धर्म , बौद्ध धर्म, जैन धर्म और इस्लाम के लिए आम प्रतीक के रूप में कमल चुना। किसी भी आस्था के लोग मंदिर की यात्रा करने और प्रार्थना या ध्यान करने के लिए स्वतंत्र हैं। मंदिर  के प्रागण में हरे भरे बाग़ है व नौ पानी के तालाब है। यह कालका जी मंदिर के पास है। सोमवार को यह मंदिर बंद रहता है।  कोई प्रवेश शुलक नहीं है।

 क़ुतुब मीनार

कुतुब मीनार, दिल्ली के पहले मुस्लिम राजा, कुतुब-उद-दीन ऐबक के द्वारा दिल्ली के अंतिम हिंदू साम्राज्य को हारने के तुरंत बाद द्वारा 1193 में बनाया गया था। यह 73 मीटर ऊँची मीनार है।पहले तीन मंजिलें लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई है। चौथे और पांचवें मंजिलें संगमरमर और बलुआ पत्थर के हैं। टावर के उत्तर पूर्व में क़ुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद, भारत में निर्मित होने वाली पहली मस्जिद थी। एक 7 मीटर ऊंची लौह स्तंभ मस्जिद के आंगन में खड़ा है।

कुतुब-उद-दीन ऐबक ने इस मीनार का निर्माण शुरू करवाया परन्तु वे केवल तहखाना ही बनवा पाया। उसके उत्तराधिकारी इल्तुतमश ने तीन मंजिलें बनवायी और 1368 में , फिरोज शाह तुगलक पांचवें और आखिरी मंजिला निर्माण किया।

गुरुद्वारा बंगला साहिब

गुरुद्वारा बंगला साहिब, आठवें सिख गुरु , गुरु हर किशन सिंह से जुड़ा हुआ माना जाता है और दिल्ली , में सबसे प्रमुख सिख गुरुद्वारा के रूप में जाना जाता है  यह पहली बार मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के शासनकाल के दौरान 1783 में सिख जनरल सरदार भगेल सिंह ने एक छोटे से मंदिर के रूप में बनाया गया था।  इसी की साथ एक ही वर्ष में दिल्ली में नौ सिख धार्मिक स्थलों के निर्माण जनरल की देख रेख में किया गया। गुरुद्वारा प्रांगण में एक सरोवर भी है। यहाँ शांति व सुंदरता का संगम देखने को मिलता है। गुरूद्वारे में गयी जा रही गुरबानी मंत्रमुग्ध करने वाली प्रतीत होती है। यह कनॉट प्लेस के पास स्थित है और सबसे नज़दीक मेट्रो स्टेशन राजीव चौंक स्टेशन है।

आज के लिए इतना ही…. फिर मिलेंगे…. तब तक अपना ख्याल रखिये… !!

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