उज्जैन नगरी की यात्रा.. भाग 2

शिप्रा नदी का घाट

shipra river ujjain

भारत एक ऐसा देश है जहा नदियों को माँ का दर्जा दिया गया है। शिप्रा नदी भी उन्ही पवित्र नदियों में से एक है जिसका जल अमृत के सामान माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की शिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से निकली है तथा इसमें स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिप्रा नदी में भगवान श्री राम ने अपने पिता माहराज दशरथ का पिंड दान किया था। शिप्रा नदी में सायं की आरती का दृश्य अत्यंत शांति प्रदान करने वाला होता है। पुराणों में शिप्रा नदी का महत्व बताया गया है। राम घाट यहाँ का एक प्रसिद्ध घाट है। जनम-जनम के पापों से मुक्त होने की लालसा मन में लिए श्रद्धालु इस घाट पर शिप्रा नदी में स्नान करते है तथा अपने श्रद्धा सुमन यही अर्पण करते है।

काल भैरव मंदिर

महाकाल की नगरी उज्जैन में शिव के तीसरे नेत्र से प्रकट हुए काल भैरव भी स्थापित है। आठ भैरवो में से एक काल भैरव के रूप में शिव इस प्राचीन मंदिर में शोभायमान है।  काल भैरव शिव का क्रोधित स्वरुप है जो सभी तारक के पापों को नष्ट करने वाला तथा अनिष्ट कारक भयों से अपने भक्त की रक्षा करने वाला है। उज्जैन के भैरव गढ़ नामक क्षेत्र में बना भगवान काल भैरव का ये मंदिर अत्यंत आश्चर्यचकित करने वाला है। इस मंदिर में स्थापित काल भैरव की प्रतिमा को मदिरा का प्रसाद चढ़ाया जाता है और जैसे ही मदिरा का भरा प्याला भगवान काल भैरव के होंठों से लगाया जाता है, देखते ही देखते वह प्याला खाली हो जाता है। यह मंदिर अत्यंत जागृत है। यहाँ श्रद्धालु दूर-दूर से भगवान के दर्शनों के लिए आते है। ऐसा मन जाता है की यहाँ सच्चे दिल से मांगी हुई मन्नत अवश्य पूरी होती है। अनेक राजाओं महाराजाओं ने यहाँ विजयश्री का आशीर्वाद माँगा और भगवान काल भैरव ने उन्हें विजयी होने आशीर्वाद दिया।

kal bhairav ujjain alcohol

ऐसा कहा जाता है की महाकाल के दर्शन कर के यदि कोई काल भैरव के दर्शन न करे तो उसकी उज्जैन की यात्रा अधूरी रह जाती है।  काल भैरव के इस मंदिर के स्थापना की कहानी बड़ी दिलचस्प है। एक बार जब ब्रह्मा जी चार पुराणों की रचना के बाद पांचवे पुराण की रचना करने लगे तो भगवान शिव ने उन्हें रोकने का प्रयास किया क्योंकि पांचवे पुराण की रचना उपयुक्त नहीं थी। परन्तु ब्रह्मा जी ने भगवान शिव की बात नहीं मानी जिस से क्रोधित हो कर उनके तीसरे नेत्र से काल भैरव प्रकट हुए और ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया जिस से उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। भगवान शिव की आराधना करने पर भगवान ने काल भैरव से कहा की ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त होने के लिए शिप्रा नदी में स्नान करने को कहा।  काल भैरव शिप्रा नदी में स्नान कर के सदा सदा के लिए उज्जैन में बस गए।

पाताल पानी झरना

patal pani waterfall near ujjain

यह झरना उज्जैन से 90 कि. मी. दूर स्थित है। उज्जैन आने वाले यात्री इस जगह जा कर यहाँ के शांत वातावरण में अपनी थकान मिटाते है। यह एक अत्यंत सुन्दर प्राकृतिक झरना है। मानसून के दिनों में यह जगह पानी के बढ़ जाने की वजह से काफी खतरनाक हो जाती है। यह इंदौर से 30 कि. मी. दूर है। उज्जैन आये यात्री टैक्सी द्वारा पातालपानी जाते है। यह झरना 300 फ़ीट की ऊंचाई से गिरता है। आसपास की हरयाली और ऊंचाई से गिरता पानी बहुत मनोरम दृश्य बनाते है।

आज के लिए इतना ही.. फिर आउंगी एक और यात्रा के साथ… तब तक अपना ख्याल रखिये……!!

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पिछले भाग के लिए क्लिक करें उज्जैन नगरी की यात्रा

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2 thoughts on “उज्जैन नगरी की यात्रा.. भाग 2

    • Hey, Thanks Ritesh for continuous visits to my blog and your kind words. 🙂
      You should visit this city.. It has amazing aroma of spirituality.. that waterfall is really nice place to go and most of all.. if go ujjain make sure you attend mahakal’s morning aarti.

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