गुलाबी नगरी जयपुर भाग -1

आज हम रूबरू होंगे राजस्थान की राजधानी, जयपुर से !!
महाराजा जयसिंह के द्वारा बसाई गयी इस नगरी का नाम भी उन्ही के नाम पे जयपुर रखा गया। प्राचीन जयपुर नगरी में हर ईमारत गुलाबी रंग की हुआ करती थी इसलिए इसका नाम गुलाबी नगरी पड़ा। आज भी शहर में बनी पुरानी दीवारें और इमारतें गुलाबी रंग की है। जयपुर शहर की रौनक देखते ही बनती है। यह शहर विदेशी पर्यटकों में ख़ासा मशहूर है। 1727 में आमेर रियासत के महाराजा सवाई जय सिंह ने अपनी राजधानी दौसा से जयपुर स्थानांतरित की और जयपुर शहर का निर्माण करवाया। 18वीं शताब्दी में बसा ये शहर आज भी जवान है, और अपने इतिहास की दास्ताँ खुद बड़ी शान से सुनाता है। इस शहर का निर्माण वास्तु कला को ध्यान में रख कर किया गया था तथा शहर के चारो तरफ एक दिवार बनायीं गयी जिसमे सात द्वार बनाये गए जिनके नाम इस प्रकार है –
चांदपोल
सूरजपोल
अजमेरी गेट
नया गेट
सांगानेरी गेट
घाट गेट
सम्राट गेट
ज़ोरावर सिंह गेट

ajmeri gate jaipur rajasthan

आईये चलते है गुलाबी नगरी की यात्रा पर…..जयपुर में कई दर्शनीय स्थल है, किले है और बाजार है।

सिटी पैलेस

city palace jaipur

इस महल का निर्माण महाराजा सवाई जय सिंह द्वारा 1729 में शुरू करवाया गया था। अपनी वास्तुकला तथा नक़्क़ाशी के लिए मशहूर यह महल शहर के बीच में स्थित है। यह महल राजपूत, मुग़ल और यूरोपीय शैली के मेल का एक अदभुद नमूना है।यहाँ आ कर वास्तु कला तथा राजपूत राजाओं की शान-ओ-शौकत के उदाहरण मिलता है। दीवारो पर बने रंग-बिरंगे मोर भारतीय वास्तुकला को व्यक्त करते है। महल प्रांगण में सात मंजलि चन्द्र महल, मुबारक महल, महारानी महल, दीवान-ए-आम तथा दीवान-ए-ख़ास है। इस महल में गोविन्द देव जी का मंदिर स्थित है जो अत्यंत दर्शनीय है। सिटी पैलेस सुबह 9.30 से शाम 5.00 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। एंट्री शुल्क भारतीय पर्यटकों के लिए 35 रूपये तथा विदेशी पर्यटकों के लिए 150 रूपए प्रति व्यक्ति है।

आमेर का क़िला

amber fort jaipur rajasthan

जयपुर शहर से 11 कि. मी. की दुरी पर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित ये किला कच्छावा राजवंश की धरोहर है। अमर रियासत के राजा मान सिंह द्वारा इस किले का निर्माण किया गया तथा उनके वंशज महाराजा सवाई जय सिंह द्वारा इसमें कुछ सुधार व पुनः निर्माण भी किये गए। इस किले का नाम हिन्दू धर्म की देवी माँ अम्बा के नाम पर रखा गया। इस क़िले में सिला देवी का प्राचीन मंदिर है जिन्हे काली माता का अवतार मन जाता है।क़िले में सुन्दर बगीचों तथा झील का दृश्य अत्यंत मंत्र्मुघ्ध करने वाला है। यह क़िला अपनी विशाल बनावट के लिए प्रसिद्ध है। इस क़िले को 2013 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में शामिल किया गया है। पर्यटकों के लिए समय है सुबह 9.30 से शाम 6.00 बजे तक।एंट्री शुल्क भारतीय पर्यटकों के लिए 25 रूपये तथा विदेशी पर्यटकों के लिए 200 रूपए प्रति व्यक्ति है।

नाहरगढ़

nahargarh jaipur rajasthan

शहर से 15 कि. मी. की दुरी पर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित ये किला किसी इस तरह खड़ा है मानो इसे दुश्मनो से नगर की रखवाली के लिए पहरेदार बना कर खड़ा किया गया हो। इस किले का निर्माण नगर की सुरक्षा के लिए किया गया था। शुरुवात में इस क़िले का नाम सुदर्शनगढ़ रखा गया था परन्तु बाद में इसका नाम नाहर सिंह के नाम पर नाहरगढ़ रखा गया। नाहर का अर्थ शेर होता है। इस क़िले का निर्माण 1734 में तत्कालीन महाराजा सवाई जय सिंह द्वारा करवाया गया था। इस क़िले से शुरू होने वाली विशाल दिवार नाहरगढ़ को जयगढ़ से जोड़ती है।

हवा महल

hawa mahal jaipur rajasthan

इस महल का निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने 1799 में करवाया था। इस ईमारत में मौजूद हवादार खिड़कियों और झरोखो की वजह से इसका नाम हवा महल पड़ा। यह महल रानियों तथा राज घराने की अन्य स्त्रियों के बाहर के नज़ारे देखने के लिए किया गया जिस से वह इन झरोखो से बहार देख सके परन्तु बहार से कोई अंदर कोई उन्हें न देख सके। इस महल का एक-एक झरोखा राजसी ठाट-बाट की कहानी कहता है। इस ईमारत का निर्माण लाल तथ गुलाबी पत्थर से किया गया था। इसमें पांच मंज़िलें है। यह शहर के दक्षिणी ओर बड़ी चौपड़ पर स्थित है।

जल महल

jal mahal jaipur rajasthan

यह महल जयपुर में स्थित मान सागर झील के बीच बना है तथा पानी के बीच बने होने की वजह से इसका नाम जल महल रखा गया। यह आमेर जाते समय रस्ते में देखा जा सकता है। पर्यटकों के लिए इक महल में जाने की अनुमति नहीं है। झील के किनारे से इसे देखा जा सकता है। झील के बीच बना यह महल रात के समय अत्यंत सुन्दर दिखाई देता है।

आपके सुझाव या यात्रा सम्बन्धी कोई प्रश्न हो तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में लिखें। 

शेष अगले पोस्ट में… फिर मिलेंगे…. तब तक अपना ख्याल रखिये…!!

गुलाबी नगरी जयपुर भाग -2

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